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2024 खत्म हो चुका है और 2025 में अब हम सब दाखिल हो चुके हैं, इस नए साल की खुशियां पूरी दुनिया में मनाई जाती है
लेकिन इस्लाम इस नए साल की खुशियां मनाने को मना करता है क्योंकि ये नया साल अंग्रेजों का नया साल है
इस्लामिक calendar के हिसाब से इस्लाम का नया साल मुहर्रम के म्हाने में शुरू होता है। इसलिए इस्लामिक मुल्कों में नया साल नहीं मनाया जाता है । दर असल इस्लाम और ईसाई दोनों अलग अलग मज़हब के मानने वाले लोग हैं।
पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा ईसाई मज़हब के मानने वाले लोग हैं और उसके बाद इस्लाम मजहब के लोग हैं।
इस्लाम धर्म में किसी दूसरे धर्म के किसी भी काम को अपनाने से मना किया गया है।
इस्लाम का नया साल मुहर्रम है, इसलिए इस्लाम और मुसलमान इस नए साल नहीं मनाते है।

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