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बिहार में सियासी यात्रा का दौर शुरू

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बिहार में सियासी पार्टियां आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारी में जुट गई हैं । सियासी बिसात बिछाने के लिए CM नीतीश कुमार महिला जनसंवाद यात्रा निकाल कर औरतों से मिल चुके हैं। अब उनकी दूसरी यात्रा प्रगति यात्रा भी शुरू होने वाली है। तो दूसरे तरफ़ असेंबली में नेता नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी भी हर ज़िला में जाकर कार्यकर्ता जनसंवाद के जरिए पार्टी के कार्यकर्ता से मिल कर अपनी सियासी गिरफ्त को मजबूत करने में लगे हुए हैं। माना जा रहा कि वह इस यात्रा के ज़रिए वो बिहार के सभी जिलों में जा कर पार्टी लीडरों से फीड बैक ले रहे हैं। साथ ही साथ आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अपने नेताओं में जोश भी भर रहे हैं। RJD लीडर तेजस्वी यादव बार बार लोगों से जुड़े मुद्दे को लेकर बड़े बड़े ऐलान भी कर रहे हैं। जो यक़ीनी तोर से नीतीश कुमार की परेशानी बढ़ाने वाले है। सियासी पंडित का कहना है कि एक पॉलिसी के तहत रह रह कर तेजस्वी यादव अपने तरकश से तीर निकाल रहे हैं। और यक़ीनन इसका निशाना आने विधानसभा चुनाव पर हैं।
उनके सियासी तरकश में औरतों के लिए हर महीने ₹2500 देने के लिए माई बहन मान योजना बिहार में बिजली सरफ़ीन को 200 यूनिट मुफ़्त बिजली और बूढ़े आदमी को 400 रुपया से बढ़ा कर 1500 करने का ऐलान तेजस्वी यादव ने कुछ पहले ही कर दिया है। तेजस्वी यादव ने ये भी ऐलान कर दिया है कि अगर 25 में राजद की सरकार बनती है तो इन मंसूबों को जल्द ही नाफिज कर दिया जाएगा। अब तेजस्वी यादव के इन सब घोषणा का असर विधानसभा चुनाव में कितना होता है ये तो वक्त ही बताएगा। लेकिन तर्कश से निकले इन तीरों ने बिहार में सियासी हल चल ज़रूर मचा दी है। तेजस्वी यादव अकसर बिहार में रोजगार तरक्की के मुद्दा को उठाते रहे हैं। वो ये भी कहते रहे हैं कि उन्होंने 11 म्हने सरकार में रहते होए लाखों लोगों को रोजगार देने का काम किया है। वो टीचरों को नोकरी देने का क्रेडिट भी खुद ही लेते हैं। जबकि बिहार में नीतीश कुमार की सियासत थोड़ी अलग रहती है। CM नीतीश कुमार का कहना है कि वो वादे पे कम और काम पर ज्यादा यक़ीन रखते हैं। उनका कहना है कि मुझे एक बदहाल रियासत मिला था । जहां लालू यादव का जंगल राज था। जिसे बेहतर बनाने में मुझे दिन रात मेहनत करनी पड़ी। अब बिहार में क़ानून का राज चलता है।
बिहार में महिला वोटरों पर नीतीश की मज़बूत पकड़ है।
छात्र और छात्राओं के पोशाक , और साइकिल गैर शादी शुद्ध के लिए छात्राओं के लिए मुनासिब रक़म पंचायत और बल्दियाती चुनाव में 50 फ़ीसद महिला को रिज़र्वेशन सरकारी में 35 फ़ीसद रिजर्वेशन नीतीश कुमार के कुछ बड़े कामों में से एक हैं।
नीतीश कुमार ने औरतों के कहने पर ही शराब बंदी जैसा बड़ा फैसला लिया था। जिसकी खूब तारीफ़ हो रही है।
वहीं BJP के साथ मिलकर सरकार चला रहे नीतीश कुमार को
विपक्षी दलों के साथ साथ अपने सहयोगी दलों से भी काई मोर्चो पर सियासी लड़ाई लड़नी पड़ रही है। क्यूंकि बिहार बीजेपी के बड़े नेता नीतीश कुमार की क़यादत में 25 का विधानसभा चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं। BJP के आला कमान ने
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव CM नीतीश कुमार की क़यादत के मामले पर अपना रुख अभि साफ़ नहीं किया है।

बिहार BJP के सदर दिलीप जायसवाल उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बार बार इस बात को कह रहे हैं कि NDA 2025 का विधानसभा चुनाव CM नीतीश कुमार की क़यादत में ही लड़ेगी।

लेकिन BJP के सीनियर लेडर और गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि NDA में कोई मतभेद नहीं होगा । जब TV के पत्रकार ने साफ़ तौर पर पूछा कि किया बिहार 2025 का विधानसभा चुनाव CM नीतीश कुमार की क़यादत में लड़ा जाएगा तो अमित शाह ने कहा कि पार्टी की पॉलिसी इस तरह के प्रोग्राम में तय नहीं होते।
ये पार्लियामणि बोर्ड का हक़ है नीतीश कुमार की पार्टी का भी हक़ है सभी पार्टियों साथ बैठ कर तय करेंगे तो बताएंगे।
अमित शाह की इन बातों से साफ़ ज़ाहिर होता है कि BJP कहीं
महाराष्ट्रा वाली पॉलिसी बिहार में भी तो नाफ़िज नहीं करेगी?

इसलिए नीतीश कुमार को ये सोचना होगा कि अगर उनकी पार्टी
बिहार में बीजेपी से कम सीटें लाएगी तो मुश्किल है कि बीजेपी
बिहार में नीतीश कुमार CM बनाए।
इसलिए सियासत के माहिर नीतीश कुमार अभि से ही इलेक्शन की तैयारियों में मसरूफ़ हो गए हैं।
उनको भी ये डर सताने लगा है के अगर हमारी पार्टी कम सीटें लाती हैं तो महाराष्ट्र वाला फार्मूला कहीं मेरे ऊपर भी नफ़ीज़ ना कर दिया जाए।
इसी सोच के साथ नीतीश कुमार महिला जनसंवाद यात्रा निकाल कर औरतों से मिल चुके हैं।
क्योंके नीतीश कुमार को अब ये खौफ सताने लगा है कि अगर उनकी पार्टी बिहार में कमज़ोर होती है और बीजेपी मजबूत होती है तो इसका असर उनकी सियासत पर भी पड़ेगा। इस लिए वो कोई भी क़दम बहुत सोच समझ कर उठा रहे हैं, और पार्टी को ज़्यादा से ज्यादा सीट दिलाने के लिए अभि से ही सियासी सफ़र का आगाज़ कर के ये इशारा दे दिया है कि वो BJP से बेहतर किरदार अदा कर के अपनी कुर्सी को बाक़ी रखने के लिए सभी तरह के हथकंडे इस्तेमाल करेगी जिसकी उन्हें ज़रूरत होगी।

वैसे भी नीतीश कुमार के बारे में कहा जाता है कि इतना जल्दी मौसम नहीं बदलता जितना जल्दी नीतीश कुमार की सोच बदलती है। नीतीश कुमार सियासत के बाजीगर है कब कौनसा फैसला लेना है वो अच्छी तरह जानते हैं।

दूसरी तरफ राजद के लिए भी इस बार रास्ता आसान नहीं है
क्योंकि कांग्रेस और राजद में सब कुछ ठीक ठाक चल रहा है ये कहना ठीक नहीं होगा। क्योंकि चुनाव से पहले इस बात के कयास लगाया जा रहा के राजद और कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं है। ये सावल इस लिए उठ रहे हैं के अभि हाल ही में बिहार कांग्रेस के रियासती सदर अखिलेश प्रसाद सिंह ने ये दवा कर दिया के कांग्रेस बिहार में 70 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी
यानी कांग्रेस को हर हाल में 70 सीट चाहिए।
कांग्रेस सदर के इस दावे पर तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा कि जो खुद सीटें तय नहीं करते उनकी किया बात करना।
तेजस्वी यादव ने कहा अभि शेयरिंग को लेकर कोई चर्चा नहीं है हुई है इसलिए अभि कौन किया बोलता है इसका कोई मतलब नहीं है।
तेजस्वी यादव के इस बयान से साफ़ ज़ाहिर होता है कि बिहार में
कांग्रेस के साथ राजद का सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
दोनों पार्टी के आला कमान के बयानों से ये तो साफ़ ज़ाहिर है कि
कांग्रेस भी इस बार राजद के सामने घुटना टेकने के लिए तैयार नहीं है, वहीं राजद ज़्यादा से ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। अब ये तो वक़्त ही बताएगा कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ते हैं

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