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— सुपौल में  इलाज के नाम पर  ठगी और बदसलूकी का आरोप, परिजन ने DM और सिविल सर्जन से लगाई गुहार

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— सुपौल में  इलाज के नाम पर  ठगी और बदसलूकी का आरोप, परिजन ने DM और सिविल सर्जन से लगाई गुहार….सुपौल जिले में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। इसी बीच जिला मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल लाइफ लाइन से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। पिपरा थाना क्षेत्र के रामनगर निवासी रामजी कुमार ने जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को लिखित आवेदन देकर अस्पताल प्रबंधन पर इलाज के नाम पर अधिक पैसे लेने, मरीज को आईसीयू में रखने और उनके साथ बदसलूकी किए जाने का आरोप लगाया है।वीओ —रामजी कुमार के मुताबिक, 20 सितंबर 2026 को उनके पिता की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। वह अपने पिता को इलाज के लिए सदर अस्पताल सुपौल लेकर आ रहे थे। लेकिन आरोप है कि रास्ते में ऑटो चालक उन्हें निजी अस्पताल लाइफ लाइन ले गया।रामजी कुमार का कहना है कि अस्पताल पहुंचते ही उनके पिता को आईसीयू में भर्ती कर दिया गया और उनके हाथ में ड्रिप लगा दी गई। इसके बाद अस्पताल कर्मियों ने मरीज की हालत बेहद गंभीर बताते हुए उन्हें डराया कि मरीज की जान भी जा सकती है।शिकायतकर्ता के मुताबिक, इसके बाद जांच और दवा के नाम पर कुछ ही समय के अंदर उनसे करीब 25 हजार रुपये जमा करवा लिए गए। बाद में उनसे और पैसे की मांग की जाने लगी।रामजी कुमार का आरोप है कि जब उन्होंने डॉक्टर से मिलने और अपने पिता को अस्पताल से डिस्चार्ज कराने की बात कही, तो अस्पताल कर्मी उनके साथ कथित तौर पर बदसलूकी करने लगे।वीओ —शिकायतकर्ता के मुताबिक, अस्पताल की ओर से उन्हें न तो मरीज से संबंधित पूरी डिस्चार्ज समरी दी गई और न ही जांच की रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई। उनका आरोप है कि काफी विरोध के बाद उन्हें एक फाइल कवर के अंदर सिर्फ एक पन्ने की फोटो कॉपी देकर अस्पताल से जाने दिया गया।रामजी कुमार का यह भी दावा है कि आईसीयू में भर्ती कराने के कुछ ही घंटे बाद जब वह अपने पिता को वहां से बाहर लेकर आए, तो उनकी हालत ठीक थी।हालांकि, अस्पताल प्रबंधन की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।वीओ —शिकायतकर्ता ने अस्पताल परिसर में शराब की खाली बोतल मिलने का भी दावा किया है। उनका कहना है कि उन्होंने इसका वीडियो भी बनाया है। यदि यह दावा सही है तो शराबबंदी वाले बिहार में अस्पताल परिसर में शराब की बोतल पहुंचने और उसके इस्तेमाल से जुड़े सवाल भी खड़े होते हैं। हालांकि, इस दावे की भी आधिकारिक पुष्टि और जांच जरूरी है।वीओ —अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी मरीज के परिजन इलाज के दौरान आर्थिक दबाव या कथित बदसलूकी की शिकायत करते हैं, तो उनकी शिकायत की जांच कौन करेगा?निजी अस्पतालों में आईसीयू और एनआईसीयू के नाम पर मरीजों के परिजनों से लिए जाने वाले शुल्क और इलाज की पारदर्शिता को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और निर्धारित मानकों को लेकर भी चर्चा जरूरी है।पीटीसी/एंकर —रामजी कुमार ने पूरे मामले की जांच और कार्रवाई की मांग को लेकर जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को आवेदन दिया है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच के बाद क्या कार्रवाई सामने आती है।इस मामले में सच्चाई क्या है, क्या वास्तव में मरीज को जरूरत के बावजूद आईसीयू में भर्ती किया गया था, क्या इलाज और जांच के नाम पर निर्धारित नियमों के मुताबिक शुल्क लिया गया और अस्पताल परिसर में शराब की बोतल मिलने के दावे में कितनी सच्चाई है—इन सभी सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।अब सुनते हैं, इस पूरे मामले पर जब हमारी टीम ने जिले के सिविल सर्जन से बात की तो उन्होंने क्या कुछ कहा…

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