9650325368 business@supaultvtimes.in
Supaul News

राघोपुर में रेलवे ढाला बंद होने के विरोध में हजारों लोग सड़क पर उतरे, खोलने की मांग को लेकर निकाली विशाल पदयात्रा

82views
Follow US on social media

सुपौल के राघोपुर से बड़ी खबर सामने आई है, जहां रेलवे ढाला फाटक संख्या 15 ए बंद किए जाने के विरोध में बुधवार को स्थानीय लोगों का गुस्सा सड़क पर देखने को मिला। हजारों की संख्या में लोग सड़क पर उतरे और रेलवे ढाला खोलने की मांग को लेकर विशाल पदयात्रा निकाली। इस दौरान लोगों ने “ढाला खोलो, ढाला खोलो” के जमकर नारे लगाए। दरअसल, राघोपुर रेलवे ओवरब्रिज पर आवाजाही शुरू होने के बाद नीचे से गुजरने वाली एनएच-106, अब एनएच-131 सड़क पर स्थित रेलवे ढाला फाटक संख्या 15 ए को लोहे की रॉड लगाकर बंद कर दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ढाला बंद होने से राघोपुर रेलवे स्टेशन और बाजार का संपर्क दर्जनों गांवों से प्रभावित हो गया है।

बुधवार को इसी के विरोध में राघोपुर रेलवे ढाला के पास से विशाल पदयात्रा शुरू हुई। पदयात्रा ओवरब्रिज के रास्ते सिमराही बाजार के जेपी चौराहे तक पहुंची। इसके बाद लोग वापस राघोपुर आरओबी होते हुए गणपतगंज पहुंचे, जहां पदयात्रा का समापन किया गया।इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। लोगों ने बिहार सरकार के डिप्टी सीएम विजेंद्र प्रसाद यादव से रेलवे ढाला को दोबारा खुलवाने की गुहार लगाई। कार्यक्रम के अंत में पांच सदस्यों की एक समिति गठित की गई, जो बिहार सरकार के डिप्टी सीएम, डीआरएम और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के नाम ज्ञापन जिलाधिकारी सावन कुमार को सौंपेगी।स्थानीय लोगों का दावा है कि रेलवे ढाला बंद होने से राघोपुर, हुलास, हरिपुर, धरहरा, चंपानगर और रामविशनपुर पंचायतों के साथ-साथ नगर पंचायत सिमराही के हजारों परिवारों के रोजगार पर असर पड़ा है। लोगों के मुताबिक, ढाला बंद होने के बाद आसपास की कई दुकानों में ताले लग गए हैं और कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।लोगों का कहना है कि पहले जिस रास्ते से कुछ ही मिनटों में एक तरफ से दूसरी तरफ पहुंचा जा सकता था, अब उसी दूरी को तय करने में काफी ज्यादा समय लग रहा है। इससे बाजार में ग्राहकों की आवाजाही कम हुई है और दुकानदार आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं।

सबसे गंभीर चिंता लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जताई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, रेलवे ढाला बंद होने के कारण अस्पताल सहित कई जरूरी संस्थानों तक पहुंचने में अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। ढाला के दूसरी तरफ कब्रिस्तान, शिव मंदिर, प्रखंड कार्यालय, थाना, रेफरल अस्पताल, कृषि विज्ञान केंद्र, आंगनबाड़ी केंद्र और पशु चिकित्सालय समेत कई महत्वपूर्ण संस्थान मौजूद हैं।लोगों का कहना है कि इन जगहों तक पहुंचने की दूरी कई मामलों में करीब चार किलोमीटर तक बढ़ गई है।वीओ —इसी बीच स्थानीय लोगों ने एक नवजात की मौत का मामला भी उठाया। पीड़ित परिवार के सदस्य का कहना है कि गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने में हुई देरी के कारण नवजात की जान चली गई। परिवार के मुताबिक, करीब 43 साल बाद घर में बेटे का जन्म हुआ था, लेकिन अस्पताल पहुंचने में देरी के कारण परिवार की खुशी मातम में बदल गई।हालांकि, इस घटना और रेलवे ढाला बंद होने के बीच सीधे कारण-परिणाम की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन स्थानीय लोग इसे ढाला बंद होने से पैदा हुई गंभीर आवागमन की समस्या से जोड़कर देख रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि राघोपुर रेलवे ढाला फाटक संख्या 15 ए दर्जनों गांवों के लिए लाइफलाइन की तरह है। इसके बंद होने से न सिर्फ आवागमन बल्कि व्यापार और रोजगार पर भी असर पड़ा है। लोगों का दावा है कि रोजगार के संकट के कारण कई लोग दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।स्थानीय लोगों ने बताया कि जब रेलवे ढाला खुला रहता था, तब राघोपुर बाजार दिन-रात गुलजार रहता था और दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ रहती थी। लेकिन ढाला बंद होने के बाद इलाका मानो दो हिस्सों में बंट गया है और बाजार की रौनक भी कम हो गई है।स्थानीय लोग पहले भी सांसद दिलेश्वर कामैत और निर्मली विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव से रेलवे ढाला खोलने की मांग कर चुके हैं। अब एक बार फिर हजारों लोगों ने सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद की है। लोगों की मांग है कि रेलवे ढाला फाटक संख्या 15 ए को जल्द से जल्द खोला जाए, ताकि आवागमन, व्यापार, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी परेशानियों का समाधान हो सके। अब देखना होगा कि प्रशासन और रेलवे की ओर से इस मांग पर क्या कदम उठाया जाता है।

Leave a Response