सुपौल में सड़क सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठक, हादसे रोकने और ब्लैक स्पॉट सुधार पर विशेष जोर


सुपौल में सड़क सुरक्षा को लेकर अहम समीक्षा बैठक, दुर्घटना रोकने और ब्लैक स्पॉट सुधार पर जोरसुपौल। जिले में सड़क हादसों पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने को लेकर बुधवार, 23 सितंबर 2026 को लहटन चौधरी सभागार में जिला सड़क सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता लोकसभा सांसद ने की। इस दौरान जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग, पथ निर्माण विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों ने सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मामलों की जानकारी साझा की।बैठक में खास तौर पर दुर्घटनाओं के कारणों की पहचान, दुर्घटना संभावित स्थानों यानी ब्लैक स्पॉट का सुधार, हादसे के बाद पीड़ितों को मिलने वाली सहायता, यातायात नियमों का पालन और लंबित मामलों के जल्द निपटारे पर चर्चा हुई।इस साल 159 सड़क दुर्घटनाएं दर्जबैठक में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2026 में अब तक सुपौल जिले में 159 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें 132 हादसे गंभीर यानी घातक श्रेणी के रहे, जबकि 27 दुर्घटनाएं गैर-घातक बताई गईं। इन हादसों में 147 लोगों की जान गई।वहीं जनवरी 2022 से 14 सितंबर 2026 तक iRAD पर दर्ज आंकड़ों में जिले में कुल 1,007 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हैं। इनमें 501 मामले हिट एंड रन और 506 मामले नॉन-हिट एंड रन से जुड़े हैं।बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जिन स्थानों पर बार-बार दुर्घटनाएं हो रही हैं, वहां सिर्फ चालान या पुलिस कार्रवाई तक सीमित न रहें। सड़क की बनावट, मोड़, ढलान, दृश्यता, सड़क की चौड़ाई, संकेतक और रोशनी जैसी तकनीकी कमियों की भी जांच कर स्थायी समाधान निकाला जाए।दुर्घटना पीड़ितों के मुआवजे में देरी नहीं करने पर जोरसांसद ने सड़क हादसों में मृतकों के परिजनों और घायलों से जुड़े मुआवजा मामलों की नियमित निगरानी करने की बात कही। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि जरूरी प्रक्रिया और दस्तावेजों को समय पर पूरा कर पीड़ित परिवारों तक सहायता जल्द पहुंचाई जाए।बैठक में यह भी कहा गया कि सड़क सुरक्षा की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें दुर्घटना होने के बाद कार्रवाई के साथ-साथ हादसा होने की संभावित वजहों को पहले ही दूर किया जा सके।ब्लैक स्पॉट पर होंगे सुरक्षा के उपायदुर्घटना संभावित स्थानों की समीक्षा के दौरान ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया। ऐसे स्थानों पर जरूरत के अनुसार रंबल स्ट्रिप, स्पीड ब्रेकर, जेब्रा क्रॉसिंग, रिफ्लेक्टर, रोड साइनेज और पैदल यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया गया।स्थानीय लोगों से भी दुर्घटना संभावित स्थानों को लेकर सुझाव लेने और उनके आधार पर सुधारात्मक कार्रवाई करने की बात कही गई।महिला के नाम पर EV खरीद पर सब्सिडी की जानकारी देने का निर्देशबैठक में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने पर भी चर्चा हुई। सांसद ने जनप्रतिनिधियों से अपने-अपने क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहन प्रोत्साहन योजना का प्रचार करने का आग्रह किया।बैठक में बताया गया कि महिला के नाम पर इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर एक लाख रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है। इसका लाभ अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए पंचायत से लेकर शहरी क्षेत्रों तक जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।घायल को अस्पताल पहुंचाने वालों को प्रोत्साहनसड़क हादसे के बाद घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले आम लोगों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। बैठक में ‘गुड सेमेरिटन’ यानी राह-वीर योजना की जानकारी दी गई, जिसके तहत पात्र मददगारों को 25 हजार रुपये तक की पुरस्कार राशि दिए जाने का प्रावधान बताया गया।अधिकारियों से इस संबंध में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने को कहा गया, ताकि हादसे के बाद घायल व्यक्ति को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके।iRAD और e-DAR के लंबित मामलों की समीक्षादुर्घटना से संबंधित ऑनलाइन रिकॉर्ड और मुआवजा प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। 14 सितंबर 2026 तक iRAD से जुड़े 254 मामलों में 228 मामलों का निष्पादन हो चुका था, जबकि 26 मामले लंबित बताए गए।इसी तरह e-DAR में दर्ज 1,007 दुर्घटना मामलों में 316 मामलों पर प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की जानकारी बैठक में दी गई। अधिकारियों को सभी आवश्यक ऑनलाइन प्रविष्टियां और रिपोर्ट समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए।यातायात नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई जारी रखने का निर्देशबैठक में हेलमेट और सीट बेल्ट के इस्तेमाल को लेकर की गई कार्रवाई की भी जानकारी दी गई। 1 अप्रैल 2025 से 22 सितंबर 2026 तक नियमों का उल्लंघन करने वाले 2,130 वाहनों पर कार्रवाई की गई और कुल 21.30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।इसके अलावा ओवरस्पीडिंग, खतरनाक तरीके से वाहन चलाने, ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करने, नाबालिगों के वाहन चलाने और अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन के खिलाफ नियमित अभियान चलाने पर जोर दिया गया।140 चालकों को दिया गया सड़क सुरक्षा प्रशिक्षणपरिवहन विभाग की ओर से सरकारी और निजी वाहन चालकों के लिए चलाए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि अब तक 140 वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण दिया जा चुका है।स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने और लोगों को हेलमेट, सीट बेल्ट, सुरक्षित गति तथा नशे में वाहन नहीं चलाने के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया गया।लोक अदालत में 456 पुराने चालानों का निपटारा12 सितंबर 2026 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान पुराने यातायात चालानों के निपटारे की भी समीक्षा हुई। जानकारी के अनुसार 90 दिनों से अधिक पुराने 456 चालानों का निष्पादन किया गया और 9 लाख 18 हजार 200 रुपये की राशि वसूल की गई।सड़क सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं पर भी चर्चाबैठक में जिले में संचालित Automated Testing Station यानी ATS की स्थिति की समीक्षा की गई। रिपोर्ट के अनुसार सुपौल में ATS कार्यरत है। इसके अलावा Driving Testing Track, Driving Training School और Institute of Driving Training and Research से जुड़ी प्रगति पर भी चर्चा हुई।IDTR की स्थापना के लिए वीरपुर अनुमंडल के बसंतपुर अंचल में 10 एकड़ जमीन नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाने की जानकारी भी बैठक में दी गई।विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोरबैठक के दौरान स्पष्ट किया गया कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए पुलिस, परिवहन, पथ निर्माण और जिला प्रशासन सहित सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों का नियमित विश्लेषण कर संवेदनशील स्थानों की पहचान, वहां जरूरी सुधार और यातायात नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। जिला प्रशासन की ओर से सड़क सुरक्षा से संबंधित निर्देशों के अनुपालन की नियमित समीक्षा करने की बात कही गई।







