SIR के खिलाफ दिल्ली में आवाज बुलंद, वोटर लिस्ट बहाल करने की मांग; कपिल सिब्बल और एसवाई कुरैशी की मौजूदगी में उठी आवाज।


नई दिल्ली में चुनावी मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विरोध की आवाज तेज होती जा रही है। सोमवार को ‘Together We Stand’ के बैनर तले आयोजित एक मीडिया कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ वकीलों, पूर्व न्यायाधीशों, चुनाव विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने SIR को वापस लेने और इससे प्रभावित मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की।इस कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी, बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बीएच मार्लापल्ले, चुनाव विशेषज्ञ योगेंद्र यादव, अधिवक्ता प्रशांत भूषण, सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वीमेन की अध्यक्ष सैयदा हमीद समेत कई लोग मौजूद रहे।योगेंद्र यादव ने आयोजकों की ओर से मांगें रखते हुए कहा कि चुनाव आयोग को देशभर में SIR की प्रक्रिया वापस लेनी चाहिए और उन सभी मतदाताओं के नाम दोबारा बहाल किए जाने चाहिए, जो SIR से पहले की मतदाता सूचियों में दर्ज थे। उन्होंने यह भी मांग की कि आगामी चुनाव जरूरत पड़ने पर सामान्य पुनरीक्षण के बाद SIR से पहले की मतदाता सूचियों के आधार पर कराए जाएं।कार्यक्रम में चुनावी मतदाता सूचियों के सार्वजनिक सामाजिक ऑडिट, SIR से संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने और इस प्रक्रिया के दौरान नाम हटने की वजह से सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से प्रभावित लोगों को लाभ दोबारा उपलब्ध कराने जैसी मांगें भी रखी गईं।कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। आयोजकों ने SIR से जुड़े फैसलों और उसकी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग की।कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग के कामकाज और SIR से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं। उन्होंने चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर सामने आई असहमति का हवाला देते हुए संबंधित फैसलों की समीक्षा की मांग की।यह प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हुई है जब चुनाव आयोग के तीन सदस्यों में से दो चुनाव आयुक्तों द्वारा SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों पर कथित तौर पर आपत्ति जताने की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, इन आपत्तियों का संबंध मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने सहित कुछ प्रक्रियाओं से था। चुनाव आयोग ने बाद में कहा कि SIR से संबंधित आदेशों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी।इस बीच, पूर्व नौकरशाहों के समूह Constitutional Conduct Group ने भी SIR को समाप्त करने की मांग की है। समूह का कहना है कि इस प्रक्रिया से मताधिकार प्रभावित होने की आशंका है और मतदाताओं पर दस्तावेजी प्रमाण का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। समूह ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े फैसलों पर भी सवाल उठाए हैं।कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी. लोकुर और दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग भी मौजूद रहे। SIR को लेकर देश में जारी बहस के बीच अब मतदाता सूची, चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विभिन्न सामाजिक समूहों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।



