पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा गरमाया, मधेपुरा में आपात बैठक — सहरसा में पत्रकार से मारपीट के बाद बढ़ी चिंता, मधेपुरा में पत्रकारों की आपात बैठक

नमस्कार, आप देख रहे हैं SUPAUL TV TIMES, मैं हूं आपकी दोस्त मीरा पांडे।सहरसा में पत्रकार के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी मुद्दे को लेकर मधेपुरा में पत्रकारों की एक आपात बैठक आयोजित की गई, जहां पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर रणनीति तैयार की गई।वीओ —मामला मधेपुरा का है, जहां जिला मुख्यालय स्थित श्री जीवन अमृत आयुर्वेद क्लीनिक में नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन की आपात बैठक आयोजित की गई।बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के प्रमंडलीय सह जिला अध्यक्ष डॉ. सुलेंद्र कुमार ने की। इस दौरान पत्रकारों के साथ लगातार हो रहे दुर्व्यवहार, मारपीट और अन्य घटनाओं को लेकर गंभीर चिंता जताई गई।बैठक में हाल ही में सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार के साथ हुई मारपीट की घटना का भी मुद्दा उठाया गया। पत्रकारों ने कहा कि मीडिया कर्मी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में जनता की समस्याओं और प्रशासनिक गतिविधियों को सामने लाने का काम करते हैं। ऐसे में पत्रकारों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार की घटनाएं बेहद गंभीर हैं।वहीं, मधेपुरा में भी पत्रकारों के साथ समय-समय पर होने वाली घटनाओं पर चिंता जताते हुए पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई।बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पत्रकारों की सुरक्षा और उनके साथ होने वाली घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई की मांग को लेकर जिला पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा जाएगा। साथ ही संबंधित मामलों में दोषी लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी।पत्रकारों ने कहा कि उन्हें निर्भीक और निष्पक्ष होकर काम करने के लिए सुरक्षित माहौल मिलना बेहद जरूरी है। पत्रकार यदि असुरक्षित महसूस करेंगे, तो जनता की आवाज को मजबूती से उठाना मुश्किल हो सकता है।बैठक में पत्रकार निरंजन कुमार, श्रीकांत राय, अमित कुमार, डॉ. सविता नंदन कुमार, मोहम्मद मुजाहिद, पवन कुमार आजाद, आरजू अंसारी, मोहम्मद माजिद, रणजीत कुमार, संतोष कुमार, संत आशिक इकबाल और परवेज आलम सहित दर्जनों पत्रकार मौजूद रहे।आउट्रो —फिलहाल पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर जिला पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपने का फैसला लिया गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं।







